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Kalki-Hindu-legends

चहुँ ओर जो कहर मचा है
प्रांत देश में समर छिड़ा है
मानवता को पतन के पथ से
वापस कब मुड़वाओगे
कल्कि तुम कब आओगे

अभी पहले में कुछ तिनके पड़े हैँ
पर कलयुग के तो सात घड़े हैं
अरे जड़ हो जाएगी मानवता
क्या फिर तुम हमें बचाओगे?
कल्कि तुम कब आओगे

राम और माधो लौट चलें हैँ
हनु परशु कहिं भटक रहे हैँ
बाट जो रहे चिरंजीवी सब
इनको कितना रुकवाओगे
कल्कि तुम कब आओगे

देवालय में कतार लगाते
ढोंगी पापी दुष्कर्मी
इन झूठे हवनो कि अग्नि से
क्या अवतरित हो पाओगे
कल्कि तुम कब आओगे

ढोल गंवार शूद्र पशु नारी
अब भी ताड़ना के अधिकारी
इनके अपमान की गाथा के तुम
कब सफे पाक करवाओगे
कल्कि तुम कब आओगे

राजा नेता वैश सिपाही
बल कि चाह में करें तबाही
इस मणिमय आसन कि होड़ में
तुम प्रथम हो कब दिखलाओगे
कल्कि तुम कब आओगे

दूषित तन मन वातावरण
साधू खोज रहे हैं वन
अश्रुपुरित पृथा हो चली
कितना इसे ओर रुलाओगे
मेरे कल्कि तुम कब आओगे

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